सुप्रीम कोर्ट से निजी कंपनियों को बडी राहत😍


निजी कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, पूरी सैलरी नहीं देने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए शुक्रवार को कहा कि कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने में विफल रहने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकती है. अदालत ने कहा कि नियोक्त और कर्मचारी 54 दिनों के लॉकडाउन अवधि के लिए भुगतान पर आपस में बातचीत कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा कि मजदूरों और उद्योग दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है और विवाद को सुलझाने के लिए आपस में प्रयास करना चाहिए.

अदालत ने राज्यों के श्रम विभागों को इन वार्ताओं को सुविधाजनक बनाने के लिए कई दिशा-निर्देश दिए. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निपटान की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने, इसे शुरू करने के लिए श्रम आयुक्तों को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा. गृह मंत्रालय की 29 मार्च की अधिसूचना की वैधता और वैधता के सवाल पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया गया था. जिसमें कहा गया कि सभी नियोक्ताओं को लॉकडाउन अवधि के दौरान अपने कर्मचारियों को पूरी मजदूरी देनी होगी.

अधिसूचना में कहा गया था कि नियोक्ता अपने श्रमिकों के वेतन का भुगतान उनके कार्य स्थलों पर, नियत तारीख पर, बिना किसी कटौती के करेंगे. न्यायमूर्ति अशोक भूषण, एसके कौल और एमआर शाह की तीन जजों वाली पीठ ने फैसला सुनाया, जिसमें केंद्र के आदेश के खिलाफ 15 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) द्वारा याचिका दायर की गई थी. 4 जून को अदालत ने निजी कंपनियों को अंतरिम संरक्षण दिया था और कहा था कि उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ को अवगत कराया था कि 29 मार्च की अधिसूचना एक अस्थायी उपाय था. शीर्ष अदालत ने कहा “आपकी अधिसूचना ने नियोक्ताओं को 100 फीसदी वेतन के भुगतान को मजबूर कर दिया है. यह लगभग 50 से 75% हो सकता है. पीठ ने माना था कि उद्योगों के साथ बातचीत के बाद समाधान खोजने के लिए कुछ चर्चाएं होनी चाहिए और सरकार को सूत्रधार की भूमिका निभानी चाहिए.

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